शनिवार, 8 सितंबर 2012

जिन को हमारी तलाश थी


आजकल वो  कहाँ   है ? जिन को हमारी तलाश थी
आजकल हम  कहाँ   है ?  उनको हमारी तलाश थी ||
 ख्यालों  मैं आजकल तो  ना चाँद  ना   जन्नत   जाते है |
बस सपनो मैं भी भटकते हैं श्मशान चले जाते हैं ||
उनकी दरिया दिली भी तो देखो
मेरे मरने के बाद उनके करीब रौशनी भी देखो
पूछा उस दिन लोगो ने इस  रास्ते पे केसे हो आप  ?
वो कहते चले गए
हम  भी सुनते चले गए
बोले हम तो आये ना थे कभी
पर उनके हाथ में तो मेरे श्मशान की मिटटी के साथ मेरा रकीब था
हमें तो विश्वास  बर्षों बाद हुआ
जब उन्हें  हमारी जगह एक  खुद्दार  की तलाश थी
वो बहुत दूर से लौट  रहे थे अँधेरे मैं
हर कोई पूछ रहा था   क्या है  हथेली  में  ?
कुछ बोलना चाहते थे पर
मेरे रकीब  ने कहा ये लोट रही है उनकी  राख   लेके श्मशान से खुशियों की तलाश में
आजकल वो कहा है ? जिन को हमारी तलाश थी
आजकल हम कहा है ?  उनको हमारी तलाश थी ||

दिनेश पारीक