मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

ये कैसी मोहब्बत है


इस रह-ऐ उल्फत के मुसाफिर  के साथ  तूने क्या किया 
कभी अपना  लिया कभी ठुकरा दिया 
मेरी मोहब्बत  मिटटी का महल तो नहीं 
कभी बना दिया तो कभी उसी मिटटी  में  मिला दिया 
तुम ने मेरे साथ वो खुशियों की बारिश जिया हैं 
कभी तुमने सरबत तो कभी शोक ऐ - जज्बात  बना दिया 
में कोई कठपुतली  तो नहीं हूँ ऐ  मेरे  मेहरबां 
जब तुमने पहना दिया  चाहा  तो उतार  दिया 
तुम  ने मेरे साथ बेस -कीमती जिंदगी जिया है 
कभी दुनिया को  बता दिया कभी कभी तुमने छुपा  लिया
में  वो कुम्हार की मिटटी  नहीं जो 
पहले  बना दिया  फिर आग  में झोंक  दिया  
आजकल लोगों का ये ही फलसफा है मेरे खुदा 
कभी हमें याद  कर लिया तो कभी हमें भुला दिया
में  कोई चलती  राहा  नहीं ( में कोई रास्ता नहीं )
तुमने  कभी ये पकड़  लिया  कभी वो छोड़  दिया  
तुम ने मेरे साथ जिदगी का वो किताब -ऐ मोहब्बत जिया 
कभी तुमने लिख लिया कभी मिटा दिया 
दिनेश पारीक ( तन्हां मेरा मन )

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

खुशबू

मर्ग  नैनी  चन्दन  के उपवन  से लगती हो
 इस बसंत  ऋतू  में  महकती  खुशबू  लगती हो
होश  तो हम तब भी खो देतें  हैं
जब तुम हमें  ( तुम  कैसे  हो भी कहे  देती हो )
कजरारे  नेन  घनघोर  काले बाल
इतराना  भी तो ऐसा  की
बदल  जाये  सब की चाल
खुशबू  भी ऐसी  फूलो  के उपवन से आती  हो
माघ  बिहू  में  भी बसंत  ऋतू  से लगती हो
देख तुम को  नैनो  ने कहा  
इस  दिल ने सुना 
राह नई जीवन ने पाई
 झरने सीखेंजिससे बहना
और  एक  सपना  बूना 
ऐसा  ख्वाब  सुनहरा  देखा
 दूभर  हो जाये  तुम से दूर रहना
चन्दन  बदन , मर्ग  लोचन  नैना
जब से मेरे  दिल में  आई
बन  बैठी  मेरी परछाई
हर  उपवन  में  बैठी कमल सी लगती हो
तुम मेरी  नहीं फिर भी अपनी सी लगती हो
भरोसा  दिलाऊ कैसे कसम भी तो खाये कैसे
तुम हमें खुदा  से भी अजीज  लगती हो 

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

प्रेम विरह


इस  वैरागी  प्रेम  ने  इतना दर्द  दिया है की 
सोते  जागते  इस दर्द  को ही सहना  पड़ता है 
जब भी सोता हूँ  तो नींद  नहीं आती  है 
और आ  भी जाये कभी आंखे बंद हो भी जाये कभी  तो 
 ये  प्रेम विरह  नहीं सोने  देता  ।। हे  मुरली  मोहन  वो मुरली  मुझे  देदो 
जिसे  में  बजाऊ  और  ना  मैं  सोऊ  न  रात  भर  उसे  सोने दूं 
और इस  प्रेम  पीड़ा  में जितना  आनंद  आये  
उतना  आनंद  तो  कही ना   आये 
बस ये पीड़ा  तभी ख़त्म  होगी जब 
जब  प्रेम   पूर्ण  संजोग  हो जाये 
और इसी  में  पूर्ण  प्रेम  हो जाये 
मुझे  कोई दूसरा  प्रेम  योग  नहीं  समझना 
और न ही इस  प्रेम  की पीड़ा  से मुक्ति 
क्यों  लोग कहते हैं  इस प्रेम  में  प्रेम विरह  है 
विरह  कहा है  दो शरीरो  में हो सकता है 
दो प्रेमी  के  आत्मोऔ  में  कहा विरह  है 
वो तो प्रतेक पल  एक दुसरे  के साथ ही रहते हैं 
इस वैरागी  मन को त्याग  कर 
वो ही सचा  प्रेम है 
प्रेम विरह  ही प्रेम  है 
 

शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

फरियाद


वो कोनसा दिन था  की आप  जिस दिन हम आपको याद  नहीं करते हैं 
फर्क इतना सा  है हम भूलने की कोशिश करते हैं 
और  हमारे नैन  फरियाद करते हैं 
उनका  क्या हाल  होगा , ये ही  गम सताता  हैं
नींद  भी नहीं आती  , और सवेरा  निकल  जाता है 
हर  तरफ  उजाला है ,  दिल  मैं एक अँधेरा  हैं ।
सामने  वो कब आयेगा  वो ही बस एक सवेरा  है ।।
इतने  जख्म  हैं दिल पर ,  मेरे फिर भी  गम नहीं है 
मौत  के  डर से भूल जाये , तुम्हे  एसे  हम नहीं हैं
हमें  मोहब्बत  भी तुम से  और नफ़रत  भी है   
आप से मिलने  की दिल; से उस से जायदा  हसरत भी है ।।
दिनेश  पारीक 

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

ये मेरी वफ़ा


ऐ  तू वफ़ा रुसवा नहीं करना
सुनो ऐसा नहीं करना
मैं पहले ही बहुत  अकेला हूँ 
मुझे और तन्हा  नहीं करना
लोग कहते हैं हाथो  की 
लकीरे  अधूरी  होती हैं 
पर तुम  उस पर  अमल  मत करना 
जुदाई भी अगर आये
दिल छोटा नहीं करना
बहु मश्रुफ हो जाना
मुझे सोचा नहीं करना
भरोसा भी जरुरी है
मगर सबका नहीं करना
मुकद्दर फिर मुकद्दर है
कभी दावा नहीं करना
जो लिखा है जरुर होगा
कभी शिकवा नहीं करना
मेरी गुजारिश तुमसे है
मुझे आधा नहीं करना
हकीकत है मिलन  अपना
इसे सपना नहीं करना
हमे तुम याद रहते हो
हमे भूला नहीं करना