महक आती है बदन से पसीने की |
मुझे जरुरत नहीं है खुशबु लगाने की ||
मजदूर हूँ यही पहचान है मेरी
मुझे जरुरत नहीं है कपड़े बदलने की ||
आराम से सोता हूँ गली या और फूटपातो पेर
मुझे जरुरत नहीं है बोछोना बिछाने की ||
सेर पेर छत्त नहीं खुला असमान है |
मुझे जरुरत नहीं है दुखो से घबराने की ||
मद्धम मद्धम सी रोशनी है चाँद सितारों की
मुझे जरुरत नहीं है चिराग जलने की ||
दिवालिया होकर बादशाह हो गया हूँ |
अब जरुरत नहीं है पैसा कमाने की ||
दिनेश पारीक