रविवार, 10 फ़रवरी 2013

ये मेरी वफ़ा


ऐ  तू वफ़ा रुसवा नहीं करना
सुनो ऐसा नहीं करना
मैं पहले ही बहुत  अकेला हूँ 
मुझे और तन्हा  नहीं करना
लोग कहते हैं हाथो  की 
लकीरे  अधूरी  होती हैं 
पर तुम  उस पर  अमल  मत करना 
जुदाई भी अगर आये
दिल छोटा नहीं करना
बहु मश्रुफ हो जाना
मुझे सोचा नहीं करना
भरोसा भी जरुरी है
मगर सबका नहीं करना
मुकद्दर फिर मुकद्दर है
कभी दावा नहीं करना
जो लिखा है जरुर होगा
कभी शिकवा नहीं करना
मेरी गुजारिश तुमसे है
मुझे आधा नहीं करना
हकीकत है मिलन  अपना
इसे सपना नहीं करना
हमे तुम याद रहते हो
हमे भूला नहीं करना