गुरुवार, 7 मार्च 2013

तुम मुझ पर ऐतबार करो ।


 तुम  मुझ पर ऐतबार करो ।
मैंने तुम्हारा हाथ थामकर  तुम्हें । उम्र भर चाहने की कसम खाई हैं 
तुम मेरी इन यादों पर ऐतबार करो । इन में  तुम्हारा ही घरोंदा है 
तुम मेरे इन होटों का ऐतबार करो !जिस पर हर वक़्त तुम्हारा ही नाम  रहता है 
तुम मेरी इन आँखों का ऐतबार  करो । जो हर पल तुम्हें देखने के लिए बेचैन रहती  हैं ।।
तुम मेरी सांसों ल ऐतबार  करो ।जिस में सिर्फ तुम्हारी खुशबू महकती है 
तुम मेरे ख्यालों और  दिल  का ऐतबार  करो  । जो तुम्हारे बगैर कही नहीं  लगता है  
तुम मेरे इस वजूद  का ऐतबार  करो  । आपके  लिए ही  मुझे बनाया  है 
तुम  मेरे  दिल  का  ऐतबार  करो , जो ये तुम्हारे  ही नाम  पे धडकता है 
तुम मुझे पर ऐतबार  करो  जो में सिर्फ तुम को अपनी मानता हूँ 
             क्यूँ कहती हो तुम
मत कहो ये तुम की अब किसी बात  पर ऐतबार  नहीं होता """"""""""""""""""
होता है बस समझोता  दिलों  का बस प्यार  नहीं होता है 
कितना  समझाऊ  तुम को और इस दिल-ऐ  नादान  को 
तुम्हारा  एक कतरा  प्यार  भी मेरे लिए सागर  होता है 
तुम  मुझ पर ऐतबार करो ।   "दिनेश पारीक "