गुरुवार, 7 मार्च 2013

तुम मुझ पर ऐतबार करो ।


 तुम  मुझ पर ऐतबार करो ।
मैंने तुम्हारा हाथ थामकर  तुम्हें । उम्र भर चाहने की कसम खाई हैं 
तुम मेरी इन यादों पर ऐतबार करो । इन में  तुम्हारा ही घरोंदा है 
तुम मेरे इन होटों का ऐतबार करो !जिस पर हर वक़्त तुम्हारा ही नाम  रहता है 
तुम मेरी इन आँखों का ऐतबार  करो । जो हर पल तुम्हें देखने के लिए बेचैन रहती  हैं ।।
तुम मेरी सांसों ल ऐतबार  करो ।जिस में सिर्फ तुम्हारी खुशबू महकती है 
तुम मेरे ख्यालों और  दिल  का ऐतबार  करो  । जो तुम्हारे बगैर कही नहीं  लगता है  
तुम मेरे इस वजूद  का ऐतबार  करो  । आपके  लिए ही  मुझे बनाया  है 
तुम  मेरे  दिल  का  ऐतबार  करो , जो ये तुम्हारे  ही नाम  पे धडकता है 
तुम मुझे पर ऐतबार  करो  जो में सिर्फ तुम को अपनी मानता हूँ 
             क्यूँ कहती हो तुम
मत कहो ये तुम की अब किसी बात  पर ऐतबार  नहीं होता """"""""""""""""""
होता है बस समझोता  दिलों  का बस प्यार  नहीं होता है 
कितना  समझाऊ  तुम को और इस दिल-ऐ  नादान  को 
तुम्हारा  एक कतरा  प्यार  भी मेरे लिए सागर  होता है 
तुम  मुझ पर ऐतबार करो ।   "दिनेश पारीक "

45 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, बहुत ठीक, प्रभावशाली और सार्थक प्रस्तुति

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  2. सुंदर और प्रभावशाली अभिव्यक्ति

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  3. बहुत ही सुन्दर और उम्दा प्रस्तुती,हम आप पर ऐतवार करते है बहुत ही प्रभावशाली रचना लिखते है.

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  4. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 09/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  5. अच्छी प्रस्तुति भाई दिनेश-
    शुभकामनायें -

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  6. एतबार होता है दिलाया नहीं जा सकता...सुंदर रचना..

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  7. विश्वास तो वो डोर है जो जुडी रहे तो अच्छा है ... इसलिए एतबार जरूरी है ...
    अच्छी रचना है ...

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  8. तुम्हारा एक कतरा प्यार भी मेरे लिए सागर होता है ...वाह इस एक पंक्ति में सारा प्यार समाहित है

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  9. कितना समझाऊ तुम को और इस दिल-ऐ नादान को
    तुम्हारा एक कतरा प्यार भी मेरे लिए सागर होता है

    waah bahut khoob,,,,sundar bhav

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  10. बरन बरन के बरन लै रचि पचि कोटि पचास ।
    चित्र काब्य कर पटी पै तै चौखट दे कास ॥

    भावार्थ : --
    विभन्न प्रकार के अक्षर/रंग/स्वर लेकर उन्हें पचास बारी गढ़-छोल ।
    चित्रपटी पर चित्र रूपक काव्य कर फिर उसे चौखट में चढ़ा ॥

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. किसी का इतवार तो कमाना पड़ता है दिनेश जी !-बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आप भी मेरे ब्लॉग का अनुशरण करें ,ख़ुशी होगी
    latest postअहम् का गुलाम (भाग एक )
    latest post होली

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  13. ...खुश्बू ,समझाऊँ .......बढ़िया समर्पण भाव की रचना ,पारीक भाई धड़कन को नहीं दिल को धड़कने दो रचना में -

    तुम मेरी धड़कन का ऐतबार करो । जो सिर्फ तुम्हारे नाम पर धडकती है /तुम मेरे दिल का एतबार करो ,तुम्हारे नाम पे धड़ कता है

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  14. ऐतबार करना... कभी कभी मुमकिन नहीं होता... सुन्दर रचना, बधाई.

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  15. विश्वास के मूल्यों पर प्यार भरी पाती.....

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  16. सुन्दर अभिव्यक्ति... शुभकामनाएं...

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  17. प्यार में एतबार तो जरुरी ही है ...
    बहुत सुन्दर रचना ...

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  18. ऐतबार तो जरूरी है । सादगी से कही गई हार्दिक अभिव्यक्ति ।

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  19. ऐतबार तो जरूरी है । सादगी से कही गई हार्दिक अभिव्यक्ति ।

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  20. वाह ... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

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  21. bahut khoobsurat kriti...aaj pahli baar apke blog par aan hua....bahut sarthak lekhan karya hai aapka...bahut bahut badhai.

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  22. ऐतबार तो खुद-ब-खुद हो जाता है...अगर प्यार सच्चा हो तो...
    सुंदर अभिव्यक्ति!
    ~God Bless!!!

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  23. कितना समझाऊ तुम को और इस दिल-ऐ नादान को
    तुम्हारा एक कतरा प्यार भी मेरे लिए सागर होता है

    ख़ूबसूरत पंक्तियां।

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  24. क्यूँ कहती हो तुम
    मत कहो ये तुम की अब किसी बात पर ऐतबार नहीं होता """"""""""""""""""
    .....kai bar aisee paristhitiyaan aa jati hain .......bahut acchi prastuti..dinesh jee.....

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  25. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति |उम्दा प्रस्तुति |
    आशा

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  26. तुम्हारा एक कतरा प्यार भी मेरे लिए सागर होता है ...........सुंदर !!

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  27. bahut khub sir.....aur mere blog par aane oe mera utsaah badane ke liye bahut bahut dhanyavaad

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