शनिवार, 16 मार्च 2013

एक शाम तो उधार दो


तुम्हें जब  भी मिलें  फुरसतें , मेरे  दिल  से  ये बोझ  उत्तार  दो 
मैं  बहुत दिनों से  उदास हूँ , मुझे  एक शाम  तो  उधार  दो 
इस दुनिया  का रंग  उतार  दो अपने  प्रेम  रंग  चढ़ा  दो
ये बेरंगी  हो गई है मेरी दुनिया  अपना  रंग  मुझे उधार  दो 
मुझे  अपने  रूप  की धुप  दो  जो चमक  सके मेरी दुनिया 
मुझे  अपने  रंग  में रंग दो  मेरे सारे जंग  उतर दो  
तुम बिन  जिया  नहीं जाता  एक  तो जीने का मक़ाम  दो 
हर  शाम मुझे  काटती  है मुझे  मौत तो आसान  दो 
मेरी ऑंखें बोझिल  हो गई हैं  ये बोझ तो उतार  दो 
 तुम बिन पतझड़ जैसा  जीवन अपना  दिल का बसंत सुमार  दो 
तुम से डोरी से डोरी बंधी रहे  मुझे ऐसा  कोई नकाब  दो
बारिश  आयी  चली गई पतझड़  जैसा ना  तुम  ख्वाब दो 
बहुत दिनों  से बे -करार  हूँ जीने की  एक वजह उधार  दो 
दिनेश पारीक 


48 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा....काफी मिलती है लाईनें मेरी लिखी रचना से कभी..:) याने कि सोच मिलती है..हा हा!!...मैं बहुत दिनों से उदास हूँ ....देख कर...

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  2. वाह क्या बात है ... दिल का हाल लिख दिया आपने तो ...
    लाजवाब ...

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  3. वो नहीं तो सब बहार रूठ जाती हैं और जब लौट आये तो बहार फिर लौट आती हैं ...
    बहुत खूब ...

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  4. बारिश आयी चली गई पतझड़ जैसा ना तुम ख्वाब दो
    बहुत दिनों से बे -करार हूँ जीने की एक वजह उधार दो

    ...बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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  5. sundar bhavpurn rachna kya khoob hale dil likha hai

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  6. आभार मित्रवर धन्यवाद

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  7. बहुत बढ़िया
    आदरणीय नामराशि -

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  8. वाह !! एक अलग अंदाज़ कि रचना ......बहुत खूब

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  9. वाह बहुत ही सुन्दर रचना |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  10. बहुत भाव भरी रचना..

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  11. बारिश आयी चली गई पतझड़ जैसा ना तुम ख्वाब दो
    बहुत दिनों से बे -करार हूँ जीने की एक वजह उधार दो ...
    सुभानाल्लाह .... ख़ुदा ख़ैर करे .............
    शुभकामनायें ....

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  12. वाह क्या बात है, शुभकामनायें ..

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  13. hriday se nikle narm se bhaav, achhi rachna

    shubhkamnayen

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  14. बहुत सुंदर भाव.....
    दिल खोल के मुस्कराऊं मैं
    बस ऐसा कोई उपहार दो .....

    खुश रहो |

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  15. ये दास्ताँ -ए-दिल ..बेहतरीन

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  16. बहुत अच्छी रचना गहन भाव लिए |
    आशा

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  17. बहुत भावपूर्ण रचना!
    ~सादर!!!

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  18. वाह...वाह....
    दिल का हाल सुने दिलवाला.....

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  19. ऐसे अनुरोध को कोई कैसे टाले भला...
    भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति...
    अनु

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  20. बहुत भावपूर्ण सहज अनुभूति..

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  21. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ।

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  22. बारिश आयी चली गई पतझड़ जैसा ना तुम ख्वाब दो
    बहुत दिनों से बे -करार हूँ जीने की एक वजह उधार दो-----waah
    bahut sunder pyar ka maheen ahsas

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  23. गज़ब की कविता...बेहद सुन्दर दर्द भरे भाव !

    ढेर सराहना के साथ,
    दीप्ति

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  24. वाह वाह क्या बात है बहुत सुन्दर

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  25. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !!!

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  26. वाह क्या खूब उकेरा है भावनाओं को .....गज़ब......

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  27. बहुत उम्दा लाजबाब प्रस्तुति ,,,दिनेश जी बधाई

    RecentPOST: रंगों के दोहे ,

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  28. बारिश आयी चली गई पतझड़ जैसा ना तुम ख्वाब दो
    बहुत दिनों से बे -करार हूँ जीने की एक वजह उधार दो
    bahut khoob ....aabhar.

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  29. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति । आपको और आपके पूरे परिवार को रंगों के त्योहार होली की शुभ कामनाएँ

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  30. बहुत ही सहज और खूबसूरत भाव, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  31. नवसंवत्सर की शुभकामनायें
    आपको आपके परिवार को हिन्दू नववर्ष
    की मंगल कामनायें

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  32. भावात्मक अभिव्यक्ति ह्रदय को छू गयी आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें नरेन्द्र से नारीन्द्र तक .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

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