रविवार, 9 दिसंबर 2012

नारी


कभी आसमान तो कभी  धरती  भी  कहा करते हैं 
फिर  नारी  की समुन्दर से तुलना किया करते है 
पता नहीं क्यों लोग लड़की को बेजान कहते हैं ? 
फिर एक नारी को मर्दो की शान कहते है  
उन  मैं भी उनकी इज्जत आबरू कहते हैं ?
फिर उस लुटी नारी को किस्मत की मारी कहते हैं 
 कभी आसमान तो कभी  धरती  भी  कहा करते हैं 
फिर  नारी  की समुन्दर से तुलना किया करते है 
लुट के आबरू दबा के पैरों मैं 
फिर उसी को ही बदनाम किया करते हैं 
न जाने क्यों लोग 
उसी मैं अपनी शान समझ ते हैं ?
लुट के अस्मत- लुट के आबरु 
लुट के उन  की जिंदगी 
घर आके नारी को ही माँ कहते हैं 
न जाने क्यों लोग इस मैं भी  मर्दों  की शान कहते है ?
कभी उस को सीता कभी उस को गीता 
कभी उस को द्रोपती   कहते हैं ?
फिर उसी नारी को करके खड़ा  
अपने ही घर मैं बे आबरू करते हैं 
फिर उसी  दुर्गा नारी की पूजा करते हैं