रविवार, 10 जून 2012

कभी हम जिंदगी से रूठ बैठे

कभी हम जिंदगी से रूठ बैठे, कभी जिंदगी हम से रूठ बैठी
पर हुआ कुछ भी नहीं
पलट के देखा तो हम से किस्मत भी रूठ बैठी
नुकसान भी मेरा हुआ और हर्जाना भी मेरी जिंदगी भर बैठी
आज दिल टूटने का अंदेसा हुआ था
हम तो उस के घर भी गए थे पर आज वो भी रूठ बैठी
कही ये वो बचपन के मिटटी कर घर जेसा लगा
कही ये मिटटी के पुतले जेसा लगा
उसको भी थी खबर मुझ को भी थी खबर
फिर भी ये जिंदगी से खेल बैठी
पलट के देखा तो हम से किस्मत भी रूठ बैठी ||
कहा लोगो ने भी मुझे एक भी आँसू न कर बेकार
जाने कब समंदर मांगने आ जाए!
यूँ तो मैं भी न रोने वाला था पर वो भी तो इतने खुश थे की उनके हिस्से का रोना मुझे आ जाये ||
कभी न वो रोये थे न अब वो रोये है फिर क्यूँ वो सकुन उसे दे बेठे 
हम तो थे उनके सामने फिर फिर भी वो उल्फत कर बेठे ||

हम तो उस के घर भी गए थे पर आज वो भी रूठ बैठी |
कभी हम जिंदगी से रूठ बैठे, कभी जिंदगी हम से रूठ बैठी||