रविवार, 13 जनवरी 2013

मैं अब नहीं रोउंगी

मैं अब नहीं रोउंगी 
 अब मैं  हसुँगी  अब मेरे साथ पूरा  देश हँसेगा 
अब तुम  रोवोगे अब मैं  हसुँगी
तुम तो मेरे कर्जदार  थे ही 
हे खुदा  तुम ने किस मिटटी  को 
मेरा वफादार  बना दिया 
जिस मिटटी  को मैंने मेरे हाथो  से सजाया  था 
उस  वफादार को ही तूने  इज्जत  का लुटेरा बना दिया 
तू क्यूँ नहीं समझ रहा ऐ  खुदा 
मैं नहीं महफूज  इस  धरा   पर
 तूने  कह तो  मैंने  बना दिया  इस को 
ये मुझे  ही  नोच  रहा है इस धरा  पर 
क्या  तूने  कहा है की वो मुझे मिटा  दे 
एक बार तू मुझे कह दे  मैं उसे  मिटा दूंगी 
ना  मैं अब  रोउंगी ना  तेरे  दर पे आउंगी 
अब तू  देख वो नहीं  माना  तो 
जिन  हाथो  से बनाया  था  
उन हाथो  से उसे मैं  मिटा दुंगी