बुधवार, 2 मई 2012

महक आती है बदन से पसीने की |


महक आती है बदन से पसीने की |
मुझे जरुरत  नहीं है  खुशबु  लगाने  की ||
मजदूर हूँ   यही  पहचान  है  मेरी
मुझे जरुरत  नहीं है कपड़े बदलने की ||
आराम से सोता हूँ गली या और फूटपातो पेर
मुझे जरुरत  नहीं है बोछोना  बिछाने की ||
सेर पेर छत्त नहीं खुला असमान है |
मुझे जरुरत  नहीं है दुखो से घबराने की ||
मद्धम मद्धम सी रोशनी है चाँद सितारों की
मुझे जरुरत  नहीं है चिराग जलने की ||
दिवालिया होकर बादशाह हो गया हूँ |
अब  जरुरत  नहीं है पैसा कमाने की ||
दिनेश पारीक