सोमवार, 2 दिसंबर 2013

थोड़े से जाओगे

तुम  ने लेली  मुझ से विदा  पर तुम  ? 
  तुम चले तो जाओगे  पर
 तुम  रह  भी जाओगे  थोड़े  से
रह  जाता  है बारिश  होने के बाद 
हवा  में नमी 
आने के बाद अश्रु  आँखों  में नमी 
जैसे  रह जाता है  अँधेरे  में 
भी  उजाले  का अहसास  
रह  जाएँगी  वो संजोई  यादें 
रह  जाएँगी वो चांदनी  रातें 
रह  जाएँगी  वो अन  छुये  पल 
जो तुम ने मेरे साथ बिताये  थे ॥ 
जैसे रह  जाता है गाय  के थन  में 
निकल ने का बाद दूध 
रह  जाता है भोर  में चाँद  की 
चांदनी  का उजाला 
तुम भी रह  जाओगे थोड़े  से 
जैसे रह  जाता है 
वो पुराने खंडहर में 
निशानियों  का उजास 
रह  जाता है जैसे प्रीतम  मिलने 
 के   बाद भी बिछड़ने  का  गम 
रह  जाता  है बारिश  होने के बाद 
हवा  में नमी 
आने के बाद अश्रु  आँखों  में नमी 
जैसे  रह जाता है  अँधेरे  में 
भी  उजाले  का अहसास
तुम्हारे  पास  होने  का अहसास 
 तुम तो चले जाओगे 
और थोडा  सा  येही  रह जाओगे 

दिनेश पारीक 
क्रमश