शुक्रवार, 17 फरवरी 2012

बोलो खरीदोगे ?

बोलो खरीदोगे ?
यहाँ जिंदगी बिकती है बिकती है मौत यहाँ 
यहाँ लाश बिकती है बिकता है जिश्म यहाँ 
यहाँ भक्त बिकते  है बिकते है भगवान यहाँ 
 बोलो खरीदोगे ?
यहाँ डाक्टर बिकते है बिकते है ईमान यहाँ 
बिकते है नेता यहाँ बिकती है जुबान यहाँ 
बिकते है अपराध यहाँ बेचती  है पुलिस यहाँ  

बोलो खरीदोगे ?
बिकती है इज्ज़त यहाँ बिकती है शर्म हया
बिकती है बेटी यहाँ बिकती है बहने यहाँ 
बिकती है ममता यहाँ बेचती  है माँ  यहाँ   

बोलो खरीदोगे ?
बिक रहा है ईमान यहाँ बेच रहे ईमानदारी  यहाँ 
बिक रहा गुनाह यहाँ बेच रहे गुनहगार यहाँ   
बिक रहा देश यहाँ बिक रहे देशवाशी यहाँ

बोलो खरीदोगे ? 
आशीष त्रिपाठी 

6 टिप्पणियाँ:

vidya ने कहा…

एक पुराना फ़िल्मी गीत याद आ गया...
दूल्हा बिकता है बोलो खरीदोगे...गीत दहेज प्रथा के खिलाफ था ..

सार्थक रचना..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 18/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Rewa ने कहा…

bahut accha likha hai....aaj ki halat ko maddenazar rakhte hue likhi gayi rachna.....nicee

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

bahut hi sahi , halat ke anusar rachna ke har shabd......

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज की स्थिति का सटीक चित्रण

Onkar ने कहा…

sach. yahan sab kuchh bikta hai.

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