सोमवार, 14 मार्च 2011

आज कल के प्रेमियों को


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दूरियां होने से यादे धुंधली हो जाती लेकिन  कुछ यादें ऐसी होती है जो जिंदगी भर आप के साथ रहती है | यादे खट्टी  मीठी सी उन्ही  यादो के झरोखों से आप सब के लिए एक कविता लायी हूँ | जो कि मेरी नहीं अश्वनी दादा कि है उनकी ही इजाजत से आप सब के सामने रख रही हूँ |
काश कभी ऐसा हो जाए ,
दुनिया में बस हम और तुम हो ,
सारा जग खो जाए ,
काश कभी ऐसा हो जाए ,,
जब जब मै तुझे याद करूं ,
तेरी जुदाई में आहें भरूं ,
तूँ मेरी बाहों में आ जाए ,
काश कभी ऐसा हो जाए ,,
सारा दिन तेरी याद में गुजरे ,
रात में ख़्वाबों में आकर ,
प्यार के मीठे गीत सुनाये,
काश कभी ऐसा हो जाए ,,
ना हो दुनिया दीन का बंधन,
ना कोई दूजा ना कोई दुश्मन ,
हम एक दूजे की बाहों में ,
दुनिया से रुखसत हो जाएँ ,
काश अगर ऐसा हो जाए ,,..
daaa
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3 टिप्‍पणियां:

  1. दिनेश जी समझ नहीं पाई ये आपकी कविता है या किसी और की ...
    हरे रंग में कविता भी स्पष्ट नज़र नहीं आ रही ...!!

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  2. आपका ब्लॉग और इसमें संगृहीत रचना रमणीय है...

    यहाँ भी आयें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो फालोवर अवश्य बने .साथ ही अपने सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ . हमारा पता है ... www.akashsingh307.blogspot.com

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  3. दिनेश जी कविता पढ ही नहीं पाया। कृपया रंग संयोजन ठीक से कर लें ताकि कविता का आनंद लिया जा सके।

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