गुरुवार, 9 सितंबर 2010

KAVITA

रूहों ने शहीदों की फिर हमको पुकारा है सरहद की सुरक्षा का अब फ़र्ज़ तुम्हारा है  हमला हो जो दुश्मन का हम जायेगे सरहद पर जाँ  देंगे वतन पर ये अरमान हमारा है  इन फिरकापरस्तों की बातों में न आ जाना मस्जिद भी हमारी है , मंदिर भी हमारा है  ये कह के हुमायूँ को भिजवाई थी इक राखी मजहब हो कोई लेकिन तू भाई हमारा है  अब चाँद भले काफ़िर कह दें  ये जहाँ वाले जिसे कहते हैं मानवता वो धर्म हमारा है  रूहों ने शहीदों की फिर हमको पुकारा है सरहद की सुरक्षा का अब फ़र्ज़ तुम्हारा