शनिवार, 24 मार्च 2012

बचपन

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन: खिला एक फूल फिर इन रेगिस्तान में. मुरझाने फिर चला दिल्ली की गलियों में. ग्रॅजुयेट की डिग्री हाथ में थामे निकल गया. इस उम्र मैं ही मैं , जि...

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  2. बहुत सुन्दर....
    मेरी टिप्पणी कहाँ गयी....???पहले भी की थी???

    check ur spam mails

    best wishes.

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  3. बढ़िया प्रस्तुति परिवेश प्रधान .

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  4. सुन्दर प्रस्तुति...बधाई

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  5. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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