शनिवार, 24 मार्च 2012

बचपन

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन: खिला एक फूल फिर इन रेगिस्तान में. मुरझाने फिर चला दिल्ली की गलियों में. ग्रॅजुयेट की डिग्री हाथ में थामे निकल गया. इस उम्र मैं ही मैं , जि...