नेता कि ईमानदारी तब दिखाई दे रही है जब उसे पैसो से खरीद लिया जाता है तो वह हमेशा के लिए बिक जाता है , लेकिन उसकी ईमानदारी तब क्यों नहीं काम आती जब जनता उसे अपने मतदान से बिकने के काबिल बनता है , अगर जनता ही उसे मतदान नहीं करेगी तो उसे खरीदेगा कौन? कोई नहीं , पहले उसे जनता खरीदती है अपने सुख के लिए . नेता ईमानदार तब कहलायेगा जब वो जनता का बन के रहे न कि जनता को ही खा जाए मिल के .
सुन्दर प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...होली की शुभकामनाएं....
जवाब देंहटाएंबहुत खूब कहा आपने...मजा आ गया !
जवाब देंहटाएंनेता कि ईमानदारी तब दिखाई दे रही है जब उसे पैसो से खरीद लिया जाता है तो वह हमेशा के लिए बिक जाता है , लेकिन उसकी ईमानदारी तब क्यों नहीं काम आती जब जनता उसे अपने मतदान से बिकने के काबिल बनता है , अगर जनता ही उसे मतदान नहीं करेगी तो उसे खरीदेगा कौन? कोई नहीं , पहले उसे जनता खरीदती है अपने सुख के लिए . नेता ईमानदार तब कहलायेगा जब वो जनता का बन के रहे न कि जनता को ही खा जाए मिल के .
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